कोडरमा जिले के सुप्रसिद्ध तीर्थस्थल ध्वजाधारी धाम में महाशिवरात्रि के अवसर पर दो दिवसीय महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस महोत्सव के दूसरे दिन लाखों श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के शिवलिंग पर जलाभिषेक कर आशीर्वाद प्राप्त किया। भक्तों की अपार भीड़ और “हर हर महादेव” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
महामंडलेश्वर श्रीश्री 1008 श्री शुखदेव दास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए ध्वजाधारी धाम के ऐतिहासिक महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि यह स्थान महर्षि कर्दम की तपोभूमि है, जहां उनकी घोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें साक्षात ध्वजा और त्रिशूल के साथ दर्शन दिए थे। इसी वजह से इस स्थान का नाम ध्वजाधारी धाम पड़ा। महर्षि कर्दम के नाम पर ही कोडरमा जिले का नाम कोडरमा पड़ा। यही कारण है कि यह धाम शिवभक्तों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है।
श्रद्धालुओं का जनसैलाब और भक्तिमय माहौल
ध्वजाधारी धाम में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हजारों भक्तों ने 777 सीढ़ियां चढ़कर पहाड़ की चोटी पर स्थित शिवलिंग तक पहुंचकर जलाभिषेक किया और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मांगा। महिलाओं और युवतियों की विशेष भागीदारी देखी गई। पूरा परिसर “बोल बम” और “हर हर महादेव” के जयकारों से गूंज उठा।
महोत्सव के दौरान ध्वजाधारी धाम का परिसर एक मेले में तब्दील हो गया। झूले, खिलौने और मिठाइयों की दुकानों पर भक्तों की भारी भीड़ लगी रही। स्थानीय व्यंजन, चाट-पकौड़ी और प्रसाद की दुकानें भी श्रद्धालुओं को खूब आकर्षित कर रही थीं।
सुरक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक कार्यक्रम
महोत्सव के दौरान एसडीओ रिया सिंह, एसडीपीओ अनिल सिंह और नगर प्रशासक शंभू कुशवाहा ने विधि व्यवस्था पर पैनी नजर बनाए रखी। एनसीसी कैडेट्स ने भी व्यवस्था बनाए रखने में अपना अहम योगदान दिया।
ध्वजाधारी आश्रम में शाम को स्थानीय स्वर संगम म्यूजिकल ग्रुप के कलाकारों द्वारा भव्य भजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ग्रुप के कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुत कर मौजूद भक्तों का मन मोह लिया। इस तरह महाशिवरात्रि का यह महोत्सव भक्ति, आस्था और उत्साह के साथ संपन्न हुआ।